Sunday, February 2, 2020

सतना के दर्शनीय स्थल
सतना एक प्राचीन स्थल है, जहां देखने और घूमने-फिरने के लिए कई शानदार स्थल मौजूद हैं। प्राचीन और धार्मिक स्थलों की यहां भरमार है। सतना जिले के अंतर्गत चित्रकूट धाम और मैहर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं, जहां साल भर पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। आप आत्मिक और मानसिक शांति के लिए चित्रकूट का भ्रमण कर सकते हैं। माना जाता है कि इस स्थल पर भगवान राम का आगमन हुआ था। आप यहां के घाट पर आ सकते है, जिसे राम घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट पर भगवान, पत्नि सीता और भाई लक्ष्मण ने यहां स्नान किया था। आप यहां के भरत मिलाप मंदिर, चित्रकूट जलप्रपात, जानकी कुंड, सति अनसूया आश्रम, गुप्त गोदावरी, पंपापुर, हनुमान धारा आदि स्थलों का भ्रमण भी कर सकते हैं। आप चित्रकूट के अलावा मैहर की सैर का प्लान बना सकते हैं। मैहर जिले का एक प्रसिद्ध स्थल है, जहां देखने योग्य कई पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिनमें शारदा मंदिर, त्रिकूट हिल्स आदि शामिल हैं। आप सतना में माधवगढ़ फोर्ट, वेंकटेश मंदिर, जगत देवी तालाब आदि स्थलों का भ्रमण भी कर सकते हैं। इसके अलावा यहां के पारंपरिक व्यजंनों का लुत्फ भी उठा सकते हैं।

सतना SATNA



सतना विंध्य पर्वत माला के बघेलखंड क्षेत्र में रीवा संभाग के


अंतर्गत आने वाला जिला है| सतना जिला सीमेंट, चूना और बीड़ी उद्योग में काफी आगे है| साथ ही इस जिले का चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय और अलाउद्दीन संगीत अकादमी अपनी अलग पहिचान रखता है| सतना के पड़ोसी जिलो में मध्य प्रदेश के रीवा, कटनी, उमरिया, शहडोल, सीधी, पन्ना और उत्तर प्रदेश का बाँदा जिला पड़ता है| सतना जिला अपने भौगोलिक स्थान यानि विंध्य श्रेणी के प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटको को अपनी ओर बरबस ही खीचता है|






जिले की धरा पर बहने वाली नदियों मे सोन, टोस, सत्ना और पासुनी नदिया प्रमुख है| सतना जिले को 10 तहसीलो में वर्गीक्रत किया गया है -
नागौद, रामपुर बघेलन, बीरसिंहपुर, मैहर, अमरपाटन, मझगवां, उचेहरा, कोटर, सतना और रामनगर |
* पर्यटक स्थल-


● चित्रकूट -


एक पवित्र, धार्मिक स्थल जहाँ प्रभु श्री राम ने वनवास के कई साल सीता जी और भाई लक्ष्मण के साथ इसी चित्रकूट के वन में रहकर बिताए थे| चित्रकूट के घने जंगल, घाटिया, पहाड़, झरने, नदिया और मंदिर श्रद्धालुओ की जिज्ञासा का हमेशा केन्द्र रहा है| चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत, गुप्त गोदावरी गुफा, सती अनुसुइयाँ आश्रम, लक्ष्मण पहाड़ी, हनुमान धारा, रामघाट, जानकी कुंड आदि प्रसिद्ध जगह है| राम नवमी और दीपावली के समय चित्रकूट में मेला लगता है|


चित्रकूट के नजदीक का रेलवे स्टेशन कर्वी में है, जो चित्रकूट से 9km दूरी पर झाँसी-इलाहाबाद लाइन का स्टेशन है|



(chitrakoot)
बस द्वारा सतना से चित्रकूट की दूरी करीब 80km है|


चित्रकूट में ठहरने के लिए अनेको धर्म शालाएँ और होटल है|




● मैहर -


इस कस्बे में शारदा माता का प्रसिद्ध मंदिर त्रिकूट पर्वत के शिखर पर स्थित है, यह स्थान प्रमुख देवी शक्ति पीठों में से एक है| नवरात्रि के समय मैहर में बहुत श्रद्धालु आते है| सतना से मैहर सड़क मार्ग से 40km दूरी पर है|




● माधवगढ़ फोर्ट -


एनएच-75 पर जिले का यह खूबसूरत किला है जो एक नदी किनारे बनाया गया था| बरसात के समय यहां ज़्यादा लोग आते है|









● मुकुंदपुर सफ़ारी -


यह वन्य प्राणियो का आश्रय स्थल है, मुकुंदपुर विशेष कर सफ़ेद टाइगर के लिए संरक्षित किया गया है| यह सेमरिया-पतेहरा मार्ग पर है|




● धारकुंडी -


प्राकृतिक नज़ारों के लिए धारकुंडी अच्छा विकल्प है, जहाँ पहाड़ों से बहती हुई जलधारा एक तालाब का रूप लेती है| धार कुंडी की वादियों मे शैल चित्र और उड़ते पक्षियों को देखना मज़ेदार लगता है| सतना से धारकुंडी 55 km दूर है| जबकि धारकुंडी में ठहरने के लिए परमहंस आश्रम एक विकल्प है |






● रामनगर -


रामनगर तहसील में वाणसागर और सरसी टापू तक जाने का अनुभव पानी के बीच वोटिंग करते हुए अच्छा ज़रूर लगेगा |







● बिरसिंहपुर -


गैवीनाथ महादेव मंदिर और सुतीक्षण आश्रम बीरसिंहपुर कस्बे के प्रमुख पर्यटन स्थान है| शिवरात्रि के दिन बीरसिंहपुर में मेला लगता है |









● भरहुत -


बौद्ध स्तूपों के लिए भरहुत जाना जाता है, हालाँकि अब ज़्यादातर स्तूप जीर्ण अवस्था में है|









● अन्य स्थान -


कूठना मंदिर (नागौद), शिव मंदिर (उचेहरा) आदि!








* मौसम -


मौसम के हिसाब से सतना जिले की सैर के लिए अगस्त से फरवरी तक का समय उपयुक्त रहता है| जबकि रामनवमी पर चित्रकूट में ज़्यादा भीड़ रहती है |








* यात्रा -


सतना जाने के लिए जबलपुर और इलाहाबाद से सीधी रेल सेवा है| जबकि चित्रकूट जाने के लिए कर्वी स्टेशन उतरे जो झाँसी - इलाहाबाद के बीच का छोटा सा स्टेशन है| सतना, मईहर और चित्रकूट आदि खास जगहों के लिए आसपास के ज़िलो से बस सेवा भी है |










* होटल-


सतना शहर, चित्रकूट और मैहर में हर बजट के होटल और धर्मशालाएँ उपलब्ध हो जाते है| मंदाकिनी रिजोर्ट (चित्रकूट) में एमपी पर्यटन का होटल है|

रीवा : एक बड़ी रियासत से एक खूबसूरत पर्यटन स्थल तक का सफर

मध्य प्रदेश स्थित रीवा कभी ब्रिटिश काल के दौरान एक बड़ी रियासत हुआ करता था, और आज राज्य के सबसे प्रमुख शहरों में गिना जाता है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक विरासत जो अपने प्राचीन किले-भवनों के साथ प्राकृतिक खजानों(वन, नदी-झरने, हरा-भरा परिदृश्य) के लिए काफी प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश के बाकी पर्यटन गंतव्यों की तरह यह भी सैलानियों के मध्य काफी ज्यादा लोकप्रिय है।
अगर आप कुदरती खूबसूरती के साथ ऐतिहासिक विरासतों को देखने में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको यहां एकबार जरूर आना चाहिए। हमारे साथ जानिए पर्यटन के लिहाज से रीवा आपके लिए कितना खास है, जानिए यहां के चुनिंदा सबसे शानदार स्थानों के बारे में।
रानी तालाब
रीवा भ्रमण की शुरूआत आप यहां के रानी तालाब से कर सकते हैं, दरअसल तालाब के रूप में प्रसिद्ध यह वास्तव में एक प्राचीन कुंआ है। रानी तालाब राज्य के सबसे पुराने कुओं में से एक है, इसलिए पर्यटक इसे देखना ज्यादा पसंद करते हैं। यह तालाब सिर्फ प्राचीन होने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह एक पवित्र जलाशय भी है क्योंकि यह राज्य के प्रसिद्ध काली मंदिर के निकट स्थित है।
माना जाता है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं को पूरा करता है, इसलिए यहां बड़ी संख्या मेंदर्शनाभिलाषियों का आगमन होता है। नवरात्रि और दिवाली के दौरान यहां भव्य पुजा और मेले का आयोजन किया जाता है।
गोविंदगढ़ महल
रीवा के ऐतिहासिक स्थलों में आप प्रसिद्ध गोविंदगढ़ महल देख सकते हैं। इस महल की भौगोलिक स्थित काफी खास है, क्योंकि आप यहां महल के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक आकर्षणों(नदी, झरना, जंगल) को भी देख सकते हैं। अतीत से जुड़े साक्ष्य बताते हैं कि इस महल का निर्माण 1881 में तत्कालीन राजा द्वारा किया गया था। महल के अलावा आप यहां गोविंदगढ़ झील भी देख सकते हैं, जिसके तट पर यह पूरा महल खड़ा है।
यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम द्वीप भी बनाए गए हैं। माना जाता है कि भारत का सबसे पहला सफेद बाघ यहीं के जंगलों में पाया गया था। महल की वास्तुकला देखने लायक है। आप यहां इन-हाउस संग्रहालय भी देक सकते हैं।






रीवा का किला
गोविंदगढ़ महल के अलावा आप यहां प्रसिद्ध रीवा का किला देख सकते हैं। इस किले का नाम शहर के नाम पर रखा गया था। माना जाता है कि इस किले का निर्माण सलीम शाह ने करवाया था जिसने इसे अपूर्ण ही छोड़ दिया था, बाद में रीवा के महाराजा ने इस किले को पूरा बनाने का कार्य करवाया। रीवा फोर्ट राज्य में बेहतरीन किलों में गिना जाता है, और यह राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं का एक गर्व प्रतीक भी है।
अपनी भव्यता और प्राचीन महत्व के कारण यह अब एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन चुका है। इतिहास और संस्कृति का एक अनोखा मिश्रण है यह किया जहां का भ्रमण एक आदर्श विकल्प रहेगा।
पुरवा जलप्रपात
PC- Syedzohaibullah
ऐतिहासिक किलों के अलावा आप यहां के खूबसूरत जलप्रपातों की सैर का आनंद ले सकते हैं। राज्य में 70 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सबसे खूबसूरत झरनों में गिना जाता है पुरवा जलप्रपात। इस झरने का जल स्रोत टोंस नदी है। ऊंची चट्टानों के साथ गिरता पानी दूर से रोमांचक एहसास दिलाता है।
पुरवा जलप्रपात का महत्व सिर्फ वर्तमान तक ही सीमितन नहीं है बल्कि इसका उल्लेख हिन्दू महाकाव्य रामायण में भी मिलता है। इसके अलावा यह एक फैमली पिकनिक स्पार्ट भी है।
क्योंटी जलप्रपात
PC- Syedzohaibullah
उपरोक्त स्थानों के अलावा आप यहां के प्रसिद्ध क्योंटी जलप्रपात की सैर का भी प्लान बना सकते हैं। क्योंटी फॉल को भारत के सबसे ऊंचे झरनों(नंबर 24 ) की सूची में शामिल किया गया है। इस जलप्रपात का जल स्रोत्र तम्सा की सहायक महाना नदी जो इस झरने की मदद से 98 मीटर की ऊंचाई से गिरती है। इस जल का इस्तेमाल पेयजल और सिंचाई के लिए भी किया जाता है। माना जाता है कि यह झरना भगवान राम-सीता से भी जुड़ा है, इसलिए यहां कई लोग पूजा अनुष्ठान भी करते हैं।